दार्जिलिंग, 08 नवंबर 2025
पश्चिम बंगाल सरकार के उस आदेश को दार्जिलिंग की पहाड़ियों ने सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा में राज्य गीत ‘बांग्लार माटी, बांग्लार जल’ गाना अनिवार्य किया गया था। गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन (जीटीए) के प्रमुख कार्यकारी अनित थापा ने शुक्रवार को स्पष्ट कर दिया कि यह नियम जीटीए क्षेत्र के किसी भी स्कूल पर लागू नहीं होगा।
जीटीए प्रमुख और भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (बीजीपीएम) के संस्थापक अनित थापा ने कहा कि जीटीए एक स्वतंत्र और स्वायत्त प्रशासनिक संरचना है, इसलिए राज्य सरकार का यह आदेश जीटीए क्षेत्र के स्कूलों पर लागू नहीं होता। उन्होंने जोर देकर कहा कि उत्तर बंगाल की पहाड़ियों में भाषाई और धार्मिक विविधता पर आधारित एक विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत है। “हर स्कूल की अपनी प्रार्थना और गीत की परंपरा है, जो राष्ट्रगान से पहले गाई जाती है। यह परंपरा आज भी जारी है और आगे भी जारी रहेगी,” थापा ने कहा।
बीजीपीएम ने इस आदेश पर दो मुख्य आधारों पर आपत्ति जताई है। पहला, यह पहाड़ी क्षेत्रों के छात्रों पर बंगाली भाषा थोपने जैसा है, जहां ज्यादातर बच्चे गोरखाली या हिंदी बोलते हैं। इससे क्षेत्र की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को ठेस पहुंचती है। दूसरा, यह स्कूलों की अपनी सुबह की प्रार्थना परंपरा तय करने की स्वायत्तता का उल्लंघन है। थापा ने स्थानीय भावनाओं और सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करते हुए कहा कि पहाड़ी स्कूलों में राज्य गीत नहीं गाया जाएगा।
यह विवाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और उसके पहाड़ी सहयोगी बीजीपीएम के बीच वैचारिक मतभेद को उजागर करता है। राज्य सरकार ने 6 नवंबर को अधिसूचना जारी कर रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित ‘बांग्लार माटी, बांग्लार जल’ को सभी स्कूलों में अनिवार्य किया था, जिसे 2023 में विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर राज्य गीत घोषित किया गया था।
जीटीए दार्जिलिंग, कर्सियांग, कालिम्पोंग और सिलीगुड़ी के कुछ हिस्सों का प्रशासन संभालता है। 2022 के जीटीए चुनावों में टीएमसी की सहयोगी बीजीपीएम ने भारी जीत हासिल की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा पहाड़ियों में अलगाववाद की पुरानी भावनाओं को फिर से हवा दे सकता है, हालांकि अनित थापा ने शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर जोर दिया है। यह मामला राज्य की सांस्कृतिक एकता बनाम क्षेत्रीय स्वायत्तता की बहस को फिर से जीवंत कर रहा है।
