झारखंड CM हेमंत सोरेन असम के तिनसुकिया में AASAA की 21वीं आदिवासी महासभा में शामिल, आदिवासी एकता और अधिकारों पर दिया जोर

तिनसुकिया, 1 फरवरी 2026

 

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज असम के तिनसुकिया जिले में आयोजित 21वीं आदिवासी महासभा में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। यह कार्यक्रम ऑल आदिवासी स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ़ आसाम (AASAA) के तिनसुकिया जिला समिति द्वारा आयोजित किया गया था, जो 29 जनवरी से 1 फरवरी तक डेहिंग स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, बारगोलाई, मार्गेरिटा में चला। इस ऐतिहासिक सभा में करीब 5 लाख आदिवासी समुदाय के लोग शामिल हुए, जहां संस्कृति, परंपराओं, संगीत, नृत्य और आदिवासी अधिकारों पर चर्चा हुई। सोरेन ने अपने संबोधन में आदिवासी एकता को मजबूत करने और भूमि अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया।

पहली बार शामिल हुए बाहर के नेता

यह पहली बार है जब किसी बाहरी राज्य के मुख्यमंत्री ने इस महासभा में भाग लिया, जो आदिवासी समुदाय के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है। AASAA की केंद्रीय कार्यकारिणी समिति ने विशेष रूप से सोरेन को झारखंड से आमंत्रित किया था, क्योंकि वे एक प्रमुख आदिवासी नेता हैं। कार्यक्रम में झारखंड के कई मंत्री और विधायक भी शामिल हुए, जिसमें आदिवासी मामलों की मंत्री लिंडा डंगोरिया और विधायक कल्पना सोढ़ो डंगानी का नाम प्रमुख है।

महासभा की मुख्य विशेषताएं

चार दिवसीय इस कार्यक्रम का उद्घाटन 29 जनवरी को हुआ, जिसमें आदिवासी कलाकृतियों, व्यंजनों, वेशभूषा, भाषा और सांस्कृतिक प्रदर्शनों की प्रदर्शनी लगाई गई। आयोजकों ने बताया कि यह सभा असम, पूर्वोत्तर राज्यों, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड से हजारों प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाई। मुख्य मुद्दों में आदिवासी समुदाय को एसटी (शेड्यूल ट्राइब) स्टेटस प्रदान करना, भूमि अधिकारों की सुरक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण शामिल थे।

कार्यक्रम में गायक जुबिन गर्ग, आदिवासी आइकन बिरसा मुंडा, AASAA के संस्थापक स्वर्गीय जस्टिन लाक्रा और प्रदीप नाग की मूर्तियों का अनावरण किया गया। अंतिम दिन की ओपन सेशन में सोरेन ने हजारों आदिवासी भाइयों-बहनों और बुजुर्गों से मुलाकात की और ‘जोहार’ के साथ उनका अभिवादन किया।

हेमंत सोरेन का संबोधन

श्री सोरेन ने अपने भाषण में कहा कि जब कोई अंग्रेजों के खिलाफ खड़े होने से डरते थे, उस वक्त झारखंड के आदिवासी बिरसा मुंडा, सिदो कानू जैसे वीरों से अंग्रेजों से लोगो लिया। आदिवासी समुदाय की एकता ही उनकी ताकत है। उन्होंने बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू और बाबा साहेब को याद करते हुए कहा कि यह महासभा आदिवासी संस्कृति को संरक्षित करने और अधिकारों के लिए संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने AASAA को आमंत्रण के लिए धन्यवाद दिया और असम के आदिवासी समुदाय के साथ झारखंड की साझेदारी पर जोर दिया। सोरेन ने यह भी उल्लेख किया कि यह उनके लिए सौभाग्य की बात है कि वे इस ऐतिहासिक सभा का हिस्सा बने।

पृष्ठभूमि और महत्व

AASAA असम में आदिवासी छात्रों का प्रमुख संगठन है, जो आदिवासी अधिकारों के लिए संघर्ष करता है। यह महासभा हर साल आयोजित होती है, लेकिन इस बार का आयोजन विशेष रूप से बड़ा था, क्योंकि इसमें राष्ट्रीय स्तर के नेता शामिल हुए। आयोजकों ने बताया कि कोई राजनीतिक महत्व नहीं है, बल्कि यह शुद्ध रूप से सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का मंच है। तिनसुकिया जिले के मार्गेरिटा क्षेत्र में 87 बीघा भूमि पर यह कार्यक्रम फैला था।

AASAA के पदाधिकारियों ने सोरेन की उपस्थिति को आदिवासी एकता की जीत बताया। स्थानीय निवासियों ने कहा कि यह कार्यक्रम उनके समुदाय को राष्ट्रीय पटल पर लाया है। सोशल मीडिया पर #21stAdivasiMahasabha, #AASAA, #HemantSoren और #AdivasiUnity जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।

 

 

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