बंगाल SIR विवाद: नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस को भी सुनवाई का नोटिस, चुनाव आयोग पर बढ़ी आलोचना

कोलकाता, 19 जनवरी 2026

 

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की सुनवाई प्रक्रिया में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन, भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी, टीएमसी सांसद देव (दीपक अधिकारी) जैसे प्रमुख व्यक्तियों को नोटिस भेजे जाने के बाद अब नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस और उनके परिवार को भी सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया गया है। इस घटना ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं जन्म दी हैं।

चंद्र कुमार बोस, जो नेताजी सुभाष चंद्र बोस के भाई शरत चंद्र बोस के वंशज हैं और पूर्व में भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी रह चुके हैं, ने कहा कि उन्हें, उनकी पत्नी और तीन बच्चों को सुनवाई के लिए बुलाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि नोटिस में कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया और यह प्रक्रिया “शुद्ध उत्पीड़न” है। बोस ने पूछा, “नेताजी के प्रपौत्र को भी नागरिकता साबित करनी होगी? देश किस दिशा में जा रहा है?” उन्होंने 16 जनवरी को कोलकाता में सुनवाई में हिस्सा लिया, लेकिन कोई विसंगति नहीं बताई गई।

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह नोटिस रूटीन प्रक्रिया का हिस्सा है। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने कहा कि चंद्र बोस सहित कई अन्य हस्तियों के गणना फॉर्म (Enumeration Form) में “लिंकेज कॉलम” (परिवार/संबंधी मैपिंग) खाली छोड़ दिया गया था, जिसके कारण सुनवाई आवश्यक हो गई। आयोग ने इसे “गुमराह करने वाली” अफवाहों से इनकार किया और कहा कि किसी की पहचान या नागरिकता पर सवाल नहीं उठाया जा रहा, बल्कि फॉर्म में तकनीकी कमी के कारण यह कदम उठाया गया।

इससे पहले अमर्त्य सेन को उनके उम्र को देखते हुए घर पर ही औपचारिकताएं पूरी की गईं, जबकि मोहम्मद शमी और उनके भाई को प्रोजेनी मैपिंग में विसंगति के कारण नोटिस मिला था। टीएमसी ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है और कहा कि यह बंगाल के गौरव का अपमान है। चंद्र बोस ने भी SIR प्रक्रिया को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इसे चुनाव के बाद किया जा सकता था और वर्तमान तरीका अस्पष्ट व अव्यवस्थित है।

SIR प्रक्रिया 16 दिसंबर 2025 से शुरू हुई है, जिसमें ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद दावे-आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं। क्लेम-ऑब्जेक्शन की अंतिम तिथि 19 जनवरी तक है, लेकिन सुनवाई सत्र 7 फरवरी तक जारी रहेंगे। इसके बाद चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ बंगाल का दौरा करेगी और विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध करना है, लेकिन प्रमुख हस्तियों को नोटिस भेजने से राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। चुनाव आयोग ने सभी को आश्वस्त किया है कि प्रक्रिया निष्पक्ष और नियमों के अनुसार चल रही है।

 

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