बांग्लादेश ने चटगांव में भारतीय SEZ रद्द किया, अब वहां डिफेंस इकोनॉमिक जोन बनाएगा; चीन के साथ अलग ड्रोन डील से भारत में चिंता

ढाका/नई दिल्ली, 30 जनवरी 2026

 

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने चटगांव (चट्टोग्राम) के मिरसराई इलाके में भारत को आवंटित विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) को रद्द कर दिया है। यह फैसला द्विपक्षीय संबंधों में बढ़ते तनाव के बीच लिया गया है। लगभग 850 एकड़ जमीन, जो पहले भारतीय कंपनियों जैसे टाटा ग्रुप के लिए आरक्षित थी, अब एक डिफेंस इकोनॉमिक जोन में तब्दील की जाएगी। यहां टैंक शेल्स, गोला-बारूद और अन्य सैन्य उपकरणों का उत्पादन किया जाएगा। इस कदम से बांग्लादेश अपनी रक्षा उद्योग को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन यह भारत के लिए रणनीतिक चिंता का विषय बन गया है।

यह फैसला मुहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार के तहत लिया गया है, जो पिछले साल अगस्त में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के गिरने के बाद सत्ता में आई थी। बांग्लादेश इकोनॉमिक जोन्स अथॉरिटी (BEZA) के कार्यकारी अध्यक्ष चौधरी अशिक महमूद बिन हारून ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र अब स्थानीय रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देगा, जिसमें हथियार, सैन्य उपकरण और अन्य सामग्री शामिल होंगी, ताकि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग पूरी की जा सके। यह परियोजना दक्षिण एशिया में बांग्लादेश को भारत और पाकिस्तान के बाद तीसरा प्रमुख ड्रोन और सैन्य उत्पादक देश बनाने की दिशा में एक कदम मानी जा रही है, हालांकि अभी उत्पादन की शुरुआत नहीं हुई है।

पृष्ठभूमि: भारत को आवंटित SEZ का इतिहास

यह SEZ 2015 में शेख हसीना सरकार के दौरान भारत को आवंटित किया गया था। इसका उद्देश्य दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा औद्योगिक शहर बनाना था, जिसमें भारतीय कंपनियां लगभग 960 करोड़ रुपये का निवेश करने वाली थीं। हालांकि, परियोजना में देरी हुई और कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। यूनुस सरकार ने पिछले साल अक्टूबर में मिरसराई और मोंगला में भारतीय SEZ परियोजनाओं को आधिकारिक रूप से समाप्त कर दिया। अब इस जमीन को BEZA के मास्टर प्लान में ‘मिलिटरी इकोनॉमिक जोन’ के रूप में शामिल किया गया है। BEZA की बैठक में मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस की अध्यक्षता में यह निर्णय लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि वैश्विक संघर्षों के कारण रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं में कमजोरियां उजागर हुई हैं, इसलिए बांग्लादेश को आत्मनिर्भर बनना जरूरी है। हालांकि, इस कदम को भारत-बांग्लादेश संबंधों में गिरावट के रूप में देखा जा रहा है। यूनुस सरकार के तहत दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा है, जिसमें सीमा विवाद, व्यापार मुद्दे और क्षेत्रीय प्रभाव शामिल हैं।

चीन के साथ ड्रोन डील: अलग लेकिन जुड़ी हुई चिंता

SEZ रद्द होने के अलावा, बांग्लादेश ने चीन के साथ एक अलग रक्षा समझौता किया है, जो भारत के लिए और चिंता का कारण बन रहा है। 27 जनवरी को बांग्लादेश एयर फोर्स (BAF) और चीन की स्टेट-ओन्ड कंपनी चाइना इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी ग्रुप कॉरपोरेशन (CETC) के बीच एक सरकारी-से-सरकारी समझौता हुआ। इस समझौते के तहत बांग्लादेश में एक ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित किया जाएगा, जिसमें टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी शामिल है।

  • स्थान: प्लांट न्यू बोगरा एयरबेस के पास बनेगा, जो भारतीय सीमा से लगभग 100 किमी दूर है।
  • उत्पादन: यहां मीडियम अल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (MALE) और वर्टिकल टेकऑफ एंड लैंडिंग (VTOL) ड्रोन्स बनाए जाएंगे। उत्पादन इस साल के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है।
  • लागत: परियोजना की कुल लागत लगभग 608 करोड़ टका (करीब 55 मिलियन डॉलर) है, जिसमें से अधिकांश चीन से आयातित तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होगा।
  • उद्देश्य: बांग्लादेश सरकार का कहना है कि ये ड्रोन्स मानवीय सहायता और आपदा प्रबंधन के लिए हैं, लेकिन भारतीय सुरक्षा विशेषज्ञ इसे रणनीतिक खतरे के रूप में देखते हैं।

यह डील पिछले साल की गई 20 J-10CE फाइटर जेट्स की आपूर्ति डील का विस्तार मानी जा रही है, जिसकी डिलीवरी इस साल के अंत से शुरू हो सकती है।

चीन का बांग्लादेश में सैन्य फुटप्रिंट बढ़ना भारत के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों के लिए खतरा माना जा रहा है, खासकर सिलिगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के पास।

 

भारत की प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय प्रभाव

भारत ने इस फैसले पर चिंता जताई है। नई दिल्ली के सुरक्षा योजनाकारों का मानना है कि चीन का बढ़ता प्रभाव बांग्लादेश को भारत के खिलाफ इस्तेमाल कर सकता है।

 

जवाब में, भारत ने बांग्लादेश को दिए गए ट्रांसशिपमेंट सुविधा को रद्द कर दिया है, जो बांग्लादेश के नेपाल, भूटान और म्यांमार के साथ व्यापार को प्रभावित करेगा।

 

दक्षिण एशिया में चीन का बढ़ता दखल क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर रहा है। बांग्लादेश अब भारत और पाकिस्तान के बाद क्षेत्र का तीसरा ड्रोन उत्पादक देश बन सकता है, लेकिन यह विकास द्विपक्षीय संबंधों को और जटिल बना सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यूनुस सरकार की नीतियां क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चुनौतीपूर्ण हैं।

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *