कोलकाता में आशा वर्कर्स का विरोध प्रदर्शन: ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ मांगों को लेकर सड़कों पर उतरीं हजारों कार्यकर्ता

कोलकाता, 21 जनवरी 2026

 

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में आज (बुधवार) आशा (Accredited Social Health Activists) कार्यकर्ताओं ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। वे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार के खिलाफ अपनी लंबित मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आईं। मुख्य मांगों में मासिक मानदेय को बढ़ाकर 15,000 रुपये करने, 5 लाख रुपये का बीमा कवरेज और अन्य लाभ शामिल हैं। वर्तमान में उन्हें केवल 5,000-5,250 रुपये मासिक मानदेय मिलता है, जो देश के अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है।

प्रदर्शन की डिटेल्स

  • स्थान: सियालदाह रेलवे स्टेशन, स्वास्थय भवन (स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय, साल्ट लेक), धर्मतला और अन्य इलाके।
  • कार्यकर्ताओं की संख्या: विभिन्न जिलों से हजारों आशा वर्कर्स पहुंचीं। कई ने ट्रेन और बस से कोलकाता आने की कोशिश की।
  • आंदोलन की शुरुआत: 23 दिसंबर 2025 से ‘काम बंद’ (cease-work) आंदोलन चल रहा है। आज स्वास्थ्य भवन का घेराव करने की योजना थी।
  • मुख्य मांगें:
    • मासिक मानदेय 5,000 से बढ़ाकर 15,000 रुपये।
    • 5 लाख रुपये का बीमा कवर।
    • अन्य लाभ जैसे पेंशन, ग्रेच्युटी और सरकारी कर्मचारी का दर्जा।

प्रदर्शन के दौरान सियालदाह स्टेशन पर कई आशा कार्यकर्ताओं ने धरना दिया। एक कार्यकर्ता ने कहा, “हम घर चलाने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं पा रहे। कोविड के दौरान हमने जान जोखिम में डालकर काम किया, लेकिन अब हमें उपेक्षित किया जा रहा है।”

पुलिस कार्रवाई और हिरासत

ममता बनर्जी सरकार ने प्रदर्शन को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए। पुलिस ने कई जिलों में आशा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया और कोलकाता पहुंचने से रोका।

  • सियालदाह और हावड़ा स्टेशनों पर बैरिकेड लगाए गए।
  • स्वास्थ्य भवन के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई।
  • कई कार्यकर्ताओं को “सावधानी के तौर पर” हिरासत में लिया गया ताकि हंगामा न हो।
  • कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव हुआ, एक कार्यकर्ता बीमार भी पड़ गई।

राज्य स्वास्थ्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं को “राजनीतिक जाल” में न फंसना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कोई राजनीतिक दल उन्हें इस्तेमाल कर रहा है। वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले भी कहा था कि वे आशा कार्यकर्ताओं के प्रति संवेदनशील हैं और समय-समय पर भत्ते बढ़ाए गए हैं। विपक्षी दल जैसे भाजपा ने सरकार पर “महिला विरोधी” होने का आरोप लगाया। कई नेताओं ने कहा कि कोविड में आशा वर्कर्स ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन अब उन्हें दमन का सामना करना पड़ रहा है।

 

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