तेहरान/दुबई, 9 जनवरी 2026
ईरान में आर्थिक संकट से उपजे सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज हो गए हैं। देश के विभिन्न शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं, जो सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के नेतृत्व वाली इस्लामी व्यवस्था के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। प्रदर्शनकारी बढ़ती महंगाई, गिरती मुद्रा (रियाल) और सुरक्षा बलों की दमनकारी कार्रवाइयों से नाराज हैं।
8 जनवरी की रात प्रदर्शन और उग्र हो गए, जब निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी की अपील पर तेहरान सहित कई शहरों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर निकले। प्रदर्शनकारियों ने “खामेनेई मुर्दाबाद”, “तानाशाह का अंत” और “शाह जिंदाबाद” जैसे नारे लगाए। कुछ जगहों पर सुरक्षा बलों की गाड़ियों में आगजनी और झड़पें हुईं।

इसके जवाब में सरकार ने देशभर में इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह बंद कर दीं और कई जगहों पर टेलीफोन लाइनें भी ठप कर दीं। इंटरनेट मॉनिटरिंग ग्रुप नेटब्लॉक्स ने पुष्टि की कि यह ब्लैकआउट प्रदर्शनों को नियंत्रित करने और सूचनाओं के प्रसार को रोकने की कोशिश है।मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, प्रदर्शनों की शुरुआत (देर दिसंबर 2025) से अब तक सुरक्षा बलों की गोलीबारी में कम से कम 45 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। नॉर्वे स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स (IHR) ने बताया कि बुधवार सबसे खूनी दिन था, जिसमें 13 लोग मारे गए। वहीं, अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) ने 2,200 से अधिक गिरफ्तारियों की सूचना दी।
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने सुरक्षा बलों से “अधिकतम संयम” बरतने की अपील की है और कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में हिंसा से बचना चाहिए। उन्होंने लोगों की मांगों को सुनने और संवाद की बात कही। हालांकि, न्यायपालिका प्रमुख और सुरक्षा अधिकारियों ने “दंगाइयों” के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
ये प्रदर्शन 2022-23 के “वुमन, लाइफ, फ्रीडम” आंदोलन के बाद सबसे बड़े हैं और सभी 31 प्रांतों के 100 से अधिक शहरों में फैल चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक संकट और विदेशी दबावों के बीच यह आंदोलन व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
