नई दिल्ली/गुवाहाटी, 2 फरवरी 2026
ऑल असम संथाल स्टूडेंट्स यूनियन (AASSU) की सेंट्रल कमेटी के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज भारत की माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। बैठक में असम राज्य में संथाल समुदाय और अन्य आदिवासी समूहों से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने संथालों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, सुरक्षा, भूमि अधिकार, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों को उठाया, साथ ही हालिया हिंसक घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
राष्ट्रपति ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों को गंभीरता से सुनने का भरोसा दिया और कहा कि इन मुद्दों पर उचित विचार किया जाएगा। विशेष रूप से कोकराझार जिले के करिगांव क्षेत्र में 20 जनवरी 2026 को हुई हिंसा की घटना पर राष्ट्रपति ने गहरी चिंता जताई। इस घटना में संथाल (अदिवासी) समुदाय के लगभग 29-30 घरों को आग के हवाले कर दिया गया था, जिससे दर्जनों परिवार बेघर हो गए और राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी। राष्ट्रपति ने पीड़ितों के लिए न्याय और उचित समाधान की उम्मीद जगाई है।

घटना का पृष्ठभूमि
कोकराझार जिले के करिगांव में 19-20 जनवरी 2026 की रात एक सड़क दुर्घटना (जिसमें बोडो युवकों की गाड़ी ने दो अदिवासियों को टक्कर मारी) के बाद दोनों समुदायों (बोडो और संथाल/अदिवासी) के बीच तनाव बढ़ गया। इससे हिंसा भड़की, जिसमें दो लोगों की मौत हुई (एक बोडो और एक अदिवासी), कई घायल हुए, घरों-दुकानों में आगजनी हुई, राष्ट्रीय राजमार्ग 27 ब्लॉक किया गया और पुलिस चौकी पर हमला हुआ। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सेना ने फ्लैग मार्च किया, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) तैनात की गई, इंटरनेट सेवाएं निलंबित की गईं और 20 से अधिक गिरफ्तारियां हुईं। ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन (ABSU) और ऑल संथाल स्टूडेंट्स यूनियन (ASSU/AASAA) ने घटना की निंदा की और शांति की अपील की।
AASSU की मांगें और संदर्भ
AASSU ने मुलाकात में असम के संथाल-अदिवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को दोहराया, जिनमें शामिल हैं:
- संथाल समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा (जो असम में अभी तक नहीं मिला है, जबकि अन्य राज्यों में मिला है)।
- हिंसा पीड़ितों को मुआवजा, पुनर्वास और सुरक्षा।
- भूमि अधिकारों की रक्षा और सामुदायिक सद्भाव बनाए रखना।
यह मुलाकात असम में आदिवासी समुदायों के बीच बढ़ते तनाव और ST दर्जे की मांगों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। हाल ही में अन्य आदिवासी संगठन भी राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंप चुके हैं। AASSU ने इस मुलाकात को न्याय और समाधान की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है।
स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है, और दोनों समुदायों से शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है। पीड़ित परिवारों को राहत शिविरों में रखा गया है, और प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है। यह घटना असम की बहु-जातीय संरचना में सामुदायिक सद्भाव की चुनौतियों को उजागर करती है।
