अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर बड़े पैमाने पर हमला किया, 55 पाकिस्तानी सैनिक ढेर होने का दावा; पाकिस्तान ने जवाब में काबुल-कंधार पर एयरस्ट्राइक की, ‘ओपन वॉर’ का ऐलान

काबुल/इस्लामाबाद, 27 फरवरी 2026
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव अब खुले युद्ध की शक्ल ले चुका है। अफगान तालिबान सरकार ने गुरुवार रात (26 फरवरी) को पाकिस्तानी सीमा पर बड़े पैमाने पर जवाबी हमला किया, जिसे हाल के पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक्स का बदला बताया जा रहा है। अफगान रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस कार्रवाई में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, कई को जिंदा पकड़ा गया और 19 से अधिक पाकिस्तानी आर्मी पोस्ट तथा दो बड़े ठिकानों पर कब्जा कर लिया गया। अफगान पक्ष ने अपनी तरफ 8 सैनिकों की मौत और 11 के घायल होने की पुष्टि की है।
यह हमला पाकिस्तान द्वारा पिछले दिनों (21-23 फरवरी) अफगानिस्तान के नंगरहार, पक्तिया और खोस्त प्रांतों में किए गए हवाई हमलों के जवाब में किया गया, जिनमें पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने टीटीपी (तेहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) और आईएसआईएस-के के कैंपों को निशाना बनाया था। अफगानिस्तान ने उन हमलों में नागरिकों, खासकर महिलाओं और बच्चों की मौत होने का आरोप लगाया था।
तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा, “पाकिस्तानी सेना द्वारा बार-बार उकसावे और उल्लंघनों के जवाब में डूरंड लाइन के साथ बड़े आक्रामक अभियान शुरू किए गए हैं।” अफगान सैन्य सूत्रों ने दावा किया कि पक्तिका, पक्तिया, खोस्त और नंगरहार जैसे क्षेत्रों में चार घंटे से अधिक चली लड़ाई में पाकिस्तानी सैनिकों के शव अफगानिस्तान लाए गए।
पाकिस्तान का तीखा पलटवार और ‘ओपन वॉर’ का ऐलान

जवाब में पाकिस्तान ने शुक्रवार की सुबह अफगानिस्तान की राजधानी काबुल, कंधार और पक्तिया प्रांतों में एयरस्ट्राइक कीं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसे “ऑपरेशन गजब लिल हक” (Righteous Fury) का हिस्सा बताया और अफगान हमले को “बिना उकसावे का” करार दिया। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने दावा किया कि पाकिस्तानी कार्रवाई में 133 अफगान सैनिक मारे गए और 200 से अधिक घायल हुए, जबकि पाकिस्तानी पक्ष से केवल 2 सैनिकों की मौत और 3 के घायल होने की बात कही गई। पाकिस्तान ने अफगान हमले के बाद संबंधों को “ओपन वॉर” घोषित कर दिया है।
कतर-मध्यस्थता वाला सीजफायर अब खतरे में

दोनों पड़ोसी देशों के बीच पिछले साल कतर की मध्यस्थता से हुआ सीजफायर अब लगभग टूट चुका है। डूरंड लाइन पर पिछले कई महीनों से तनाव जारी था, जिसमें छोटी-मोटी झड़पें आम थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि टीटीपी जैसे समूहों को अफगानिस्तान से समर्थन मिलने का पाकिस्तानी आरोप और तालिबान का पाकिस्तानी हवाई हमलों पर नागरिक मौतों का दावा इस संघर्ष की जड़ है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है, लेकिन स्थिति तेजी से बिगड़ती दिख रही है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य संगठन घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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