भागलपुर, 15 जनवरी 2026
भागलपुर जिले के पीरपैंती में अदाणी पावर प्लांट का निर्माण कार्य शुरू होते ही पूरे इलाके में उत्साह और उम्मीद की लहर दौड़ गई है। वर्षों से पलायन, बेरोज़गारी और सीमित संसाधनों से जूझ रहे इस क्षेत्र के लोगों को अब लगने लगा है कि विकास उनके दरवाज़े पर दस्तक दे चुका है। स्थानीय लोगों के लिए यह परियोजना केवल एक औद्योगिक ढांचा नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य का भरोसा है। निर्माण कार्य के दौरान करीब 10 हजार से अधिक लोगों को रोज़गार मिलने की संभावना है, जिसमें स्किल्ड और नॉन-स्किल्ड—दोनों तरह के श्रमिकों के लिए अवसर उपलब्ध होंगे। इससे न सिर्फ़ आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी, बल्कि युवाओं को अपने ही क्षेत्र में काम मिलने से पलायन पर भी रोक लगेगी।

पावर प्लांट एक नज़र में –
आवंटित भूमि: लगभग 1200 एकड़
क्षमता: 3×800 मेगावाट (2400 मेगावाट)
निर्माण अवधि: 5 वर्ष
पिछले साल सितंबर माह में ऊर्जा सचिव मनोज कुमार सिंह ने शिलान्यास अवसर पर इस पावर को बिहार के ऊर्जा भविष्य के लिए एक अहम कदम बताया है।उन्होंने कहा था कि निर्धारित समय से पहले ही पहले चरण में 2028 तक बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
सीएसआर से सामाजिक बदलाव की शुरुआत

अदाणी समूह ने निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही पीरपैंती क्षेत्र में कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत कई जनकल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत कर दी है। कड़ाके की ठंड में 10 हजार से अधिक कंबलों का वितरण कर जरूरतमंदों को राहत दी गई।
पहाड़िया जनजाति के गांवों में विशेष ध्यान देते हुए सोलर हाई मास्ट लाइट और सोलर स्ट्रीट लाइट लगाई गई हैं, जिससे अंधेरे में डूबे गांवों में रौशनी पहुंची है। शिक्षा के क्षेत्र में स्कूली बच्चों को स्कूल बैग, कॉपी और स्टेशनरी उपलब्ध कराई गई, वहीं कई स्कूलों में पीने के पानी के लिए वाटर कूलर लगाए गए हैं।
स्वास्थ्य और पर्यावरण पर भी फोकस

ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए गांव-गांव में हेल्थ कैंप लगाने की योजना है। साथ ही किसानों और पशुपालकों को ध्यान में रखते हुए मवेशियों के लिए पशु चिकित्सा कैंप भी प्रस्तावित हैं। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कंपनी ने प्रति वर्ष एक लाख वृक्षारोपण करने की कार्ययोजना बनाई है, जिससे हरियाली और संतुलित विकास को बढ़ावा मिलेगा।
उम्मीदों का पावर प्लांट

कुल मिलाकर, पीरपैंती में बन रहा यह पावर प्लांट सिर्फ़ बिजली उत्पादन की परियोजना नहीं, बल्कि रोज़गार, सामाजिक विकास और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनकर उभर रहा है। स्थानीय लोगों की नजर में यह सचमुच उम्मीदों का पावर प्लांट है—जो अंधेरे से उजाले की ओर ले जाने का भरोसा देता है।
