खरगोन, 15 जनवरी 2026
मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में आदिवासी नायक और ‘रॉबिन हुड ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर टंट्या मामा भील की मूर्ति स्थापना में बड़ा घोटाला सामने आया है। नगर पालिका ने करीब 9.90 लाख रुपये की धातु या संगमरमर की मूर्ति लगाने के लिए टेंडर जारी किया था, लेकिन ठेकेदार ने उसकी जगह सस्ती फाइबर (FRP) से बनी मूर्ति लगा दी, जिसकी असल कीमत 50 हजार से 1 लाख रुपये के बीच बताई जा रही है। इस मूर्ति का लोकार्पण खुद जिले के विधायक बालकृष्ण पाटीदार और कलेक्टर भव्या मित्तल ने किया था, लेकिन घोटाले का खुलासा होने पर प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं और आदिवासी समाज में गहरा आक्रोश फैल गया है।
मामले की पृष्ठभूमि और घोटाले का खुलासा
यह विवाद खरगोन शहर के बिस्टान नाका तिराहे पर स्थापित टंट्या मामा की 9 फुट ऊंची मूर्ति से जुड़ा है। जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर इस मूर्ति की स्थापना की गई थी, जिसके लिए नगर पालिका परिषद ने 40 लाख रुपये के कुल बजट में से 9.90 लाख रुपये सिर्फ मूर्ति के लिए आवंटित किए थे। टेंडर दस्तावेजों और कलेक्टर के निर्देशों में स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि मूर्ति अष्टधातु, ब्रॉन्ज, पत्थर या संगमरमर से बनी होनी चाहिए।
हालांकि, ठेकेदार पिनाक ट्रेडिंग कंपनी, खरगोन ने धातु की बजाय फाइबर रेजिन पॉलीमर (FRP) से बनी सस्ती मूर्ति स्थापित कर दी। जानकारों का कहना है कि इस फाइबर मूर्ति की बाजार कीमत महज 50 हजार से 1 लाख रुपये है, जबकि नगर पालिका ने पूरे 9.90 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। इससे लगभग 9 लाख रुपये के भ्रष्टाचार की आशंका जताई जा रही है। मूर्ति का अनावरण 15 नवंबर 2025 को किया गया था, लेकिन हाल ही में स्थानीय लोगों और विपक्षी दलों की शिकायतों के बाद यह घोटाला उजागर हुआ।
लोकार्पण और प्रशासन की भूमिका पर सवाल
मूर्ति का लोकार्पण खरगोन विधायक बालकृष्ण पाटीदार और कलेक्टर भव्या मित्तल ने किया था। लेकिन घोटाले का पता चलने पर कलेक्टर मित्तल ने तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने मूर्ति को तत्काल बदलने, ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू करने का आदेश जारी किया है। नगर पालिका अध्यक्ष और सीएमओ ने दावा किया कि उन्हें मूर्ति की सामग्री के बारे में जानकारी नहीं थी, लेकिन विपक्ष ने इसे लापरवाही या साजिश करार दिया है।
आदिवासी समाज और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
टंट्या मामा को आदिवासी समाज का गौरव माना जाता है, जो ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ते हुए शहीद हुए थे। इस घोटाले से आदिवासी समुदाय में गहरी नाराजगी है, और कई संगठनों ने इसे ‘आस्था से खिलवाड़’ और ‘नायक का अपमान’ बताया है। कांग्रेस ने कलेक्टर से शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष रवि नाइक और पूर्व विधायक रवि जोशी ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की। जोशी ने इसे ‘सीधा अपमान और बड़ा भ्रष्टाचार’ करार दिया। वहीं, सत्तारूढ़ दल ने मामले की जांच का वादा किया है, लेकिन विपक्ष इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है।
आगे की कार्रवाई और व्यापक प्रभाव
कलेक्टर भव्या मित्तल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कमेटी गठित करने का संकेत दिया है। ठेकेदार पिनाक ट्रेडिंग कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है, और मूर्ति को जल्द ही धातु की नई मूर्ति से बदलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह घोटाला मध्य प्रदेश में सरकारी ठेकों और सार्वजनिक कार्यों में पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है, खासकर आदिवासी क्षेत्रों में जहां भावनाएं जुड़ी होती हैं। आदिवासी समाज ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
