नई दिल्ली, 12 मार्च 2026
वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत को महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता मिली है। ईरान ने भारतीय झंडे वाले टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित रूप से गुजरने की अनुमति दे दी है। सूत्रों के हवाले से न्यूज एजेंसी ANI ने यह जानकारी दी है।
यह फैसला विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच हुई बातचीत के बाद आया है। दोनों नेताओं के बीच यह तीसरी उच्च-स्तरीय वार्ता थी, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा, भारत की ऊर्जा जरूरतें और क्षेत्रीय स्थिति पर विस्तृत चर्चा हुई।
प्रमुख डेवलपमेंट
- कम से कम दो भारतीय टैंकर—पुष्पक और परिमल—इस रणनीतिक महत्व के जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजर रहे हैं।
- ईरान ने अमेरिका, इजरायल, यूरोप और उनके सहयोगी देशों से जुड़े जहाजों पर प्रतिबंध जारी रखा है, लेकिन भारत जैसे मित्र देशों के जहाजों को विशेष छूट दी गई है।
- होर्मुज स्ट्रेट से विश्व का लगभग 20% तेल और प्राकृतिक गैस गुजरता है, जिसमें भारत की बड़ी हिस्सेदारी (करीब 40% कच्चा तेल और 50% LNG आयात) शामिल है।
- संघर्ष के कारण स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई थी, जिससे वैश्विक तेल की कीमतें $100-113 प्रति बैरल तक पहुंच गईं और भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा मंडरा रहा था।
कूटनीतिक पृष्ठभूमि
ईरान ने अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद स्ट्रेट को ‘नो-गो’ क्षेत्र घोषित कर दिया था और IRGC नेवी ने चेतावनी दी थी कि बिना अनुमति के गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है। कई जहाजों पर हमले भी हुए, जिसमें थाई और लाइबेरिया फ्लैग वाले जहाज शामिल थे।
भारत ने इस दौरान अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कूटनीतिक प्रयास तेज किए। जयशंकर-अराघची वार्ता में भारत ने मित्रवत संबंधों और ऊर्जा व्यापार की निरंतरता पर जोर दिया, जिसके परिणामस्वरूप ईरान ने भारतीय टैंकरों को पास करने का फैसला किया।
प्रभाव और राहत
यह भारत के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट ब्लॉकेज से कच्चे तेल और LPG की आपूर्ति बाधित हो सकती थी, जिसका असर पेट्रोल-डीजल कीमतों और अर्थव्यवस्था पर पड़ता। सरकार पहले से ही वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़ा रही है, लेकिन इस अनुमति से मुख्य रूट सुरक्षित हो गया है।
हालांकि स्थिति नाजुक बनी हुई है, और अन्य देशों के जहाजों पर खतरा जारी है। भारत ने अपने जहाजों और नाविकों की सुरक्षा के लिए निगरानी बढ़ा दी है।
