दिशोम गुरु शिबू सोरेन की 82वीं जयंती: हेमंत सोरेन का भावुक संदेश, संघर्ष और विरासत की याद

रांची, 11 जनवरी 2026

 

आज झारखंड के ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन की 82वीं जयंती मनाई जा रही है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक, पूर्व मुख्यमंत्री और अलग झारखंड राज्य के प्रमुख योद्धा शिबू सोरेन को इस अवसर पर पूरे राज्य में श्रद्धांजलि दी जा रही है।

उनके पुत्र और वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर एक अत्यंत भावुक पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने अपने पिता को न केवल एक महान नेता के रूप में, बल्कि एक प्रेरणादायक पिता के रूप में याद किया।

हेमंत सोरेन ने लिखा:

“आज, मेरे बाबा, दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी की जन्मजयंती है। यह मेरे लिए महज एक महान नेता का जन्मदिन नहीं है, बल्कि उस पिता की याद है जिन्होंने मुझे जीवन जीने की कला सिखाई, संघर्ष करना सिखाया और सबसे महत्वपूर्ण, बिना झुके अपनी गरिमा, मूल्यों और सच्चाई पर अडिग रहना सिखाया।
बाबा ने पूरे जीवन अन्याय के सामने कभी सिर नहीं झुकाया। उन्होंने जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। मैंने उन्हें कई बार थका हुआ देखा, लेकिन टूटते कभी नहीं देखा। उनकी वो अटूट इच्छाशक्ति और दृढ़ता आज भी मेरे अंदर जीवित है।
एक पुत्र के नाते मैंने उनसे सादगी सीखी, मुश्किलों से कभी पीठ न दिखाने का साहस सीखा, और सत्ता को हमेशा जन-सेवा का माध्यम मानना सीखा।
बाबा, आपके दिखाए मार्ग पर, आपके दिए आदर्शों पर मैं जीवन भर चलता रहूँगा… जय झारखंड! जय दिशोम गुरु! आपकी स्मृति हमेशा अमर रहे।”

हेमंत सोरेन की पत्नी सह विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन भी अपने पोस्ट में लिखा “आज बाबा की जयंती है। झारखंड के साथ हमारा घर उनकी यादों से भरा है, पर उनकी कमी से एक अजीब सी ख़ामोशी भी है।उनके बिना, परिवार का मतलब ही अधूरा लगता है। वो हमारी नींव थे, हमारी आत्मा थे। उन्होंने हमें सिखाया कि असली परिवार ईमानदारी, सम्मान और एक-दूसरे के साथ खड़े रहने से बनता है।

शिबू सोरेन का संघर्षपूर्ण जीवन और राजनीतिक यात्रा

शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था। संथाल जनजाति से ताल्लुक रखने वाले शिबू सोरेन ने कम उम्र में ही साहूकारों के शोषण के खिलाफ आवाज उठाई। 15 साल की उम्र में पिता के निधन के बाद उन्होंने संताल नवयुवक संघ बनाया और 1972-73 में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य बिहार से अलग झारखंड राज्य की मांग था।

दशकों तक चले आंदोलन में उन्होंने जल, जंगल, जमीन के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। कई बार जेल गए, लेकिन कभी हार नहीं मानी। उनका यह अथक संघर्ष 15 नवंबर 2000 को फलीभूत हुआ, जब झारखंड अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।

राजनीतिक सफर में शिबू सोरेन दुमका से कई बार लोकसभा सांसद चुने गए (1980, 1989-98, 2002-2019 तक कुल 8 बार)। वे राज्यसभा सदस्य भी रहे। झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने तीन बार पद संभाला (2005 में 10 दिन, 2008-09 और 2009-10)।

प्रमुख उपलब्धियां और विरासत

  • अलग झारखंड राज्य की स्थापना में निर्णायक भूमिका
  • आदिवासी, दलित और शोषित वर्गों के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष
  • JMM को मजबूत राजनीतिक ताकत बनाना
  • गरीबों, खनन मजदूरों और आदिवासियों की आवाज बनना

आज उनकी जयंती पर रांची के टाना भगत स्टेडियम में “गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना” संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जहां मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन छात्रों से सीधा संवाद करेंगे। पूरे राज्य में विभिन्न संगठन और पार्टी कार्यकर्ता श्रद्धांजलि सभा आयोजित कर रहे हैं। दिशोम गुरु शिबू सोरेन का जीवन संघर्ष, त्याग और जनसेवा का प्रतीक है। उनकी स्मृति झारखंड की आत्मा में हमेशा जीवित रहेगी।

 

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