झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी का 68वां जन्मदिन: देशभर से बधाइयों का सिलसिला, जनसेवा की प्रेरणा बने रहे नेता

रांची, 11 जनवरी 2026

 

आज झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री, वर्तमान में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी का 68वां जन्मदिन बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। एक साधारण आदिवासी परिवार से निकलकर राज्य की राजनीति के शिखर तक पहुंचे मरांडी को देशभर से राजनीतिक दलों, नेताओं, कार्यकर्ताओं और आम जनता की ओर से ढेर सारी बधाइयां और शुभकामनाएं मिल रही हैं।

सोशल मीडिया पर उनके जन्मदिन पर बधाई संदेशों का तांता लगा हुआ है। झारखंड के राज्यपाल, भाजपा के वरिष्ठ नेता, विधायक और हजारों कार्यकर्ताओं ने उन्हें दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और निरंतर जनसेवा की शुभकामनाएं दी हैं। कई नेताओं ने “जीवेत शरदः शतम्” लिखकर प्रार्थना की है कि बाबा बैद्यनाथ उनकी लंबी आयु और स्वास्थ्य बनाए रखें।

यहां कुछ प्रमुख बधाई संदेश:

  • झारखंड के राज्यपाल ने लिखा: “झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष श्री बाबूलाल मरांडी जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु की कामना करता हूं।”
  • भाजपा के राष्ट्रीय और राज्य स्तर के नेताओं ने उन्हें आदिवासी अस्मिता के प्रतीक और जनसेवा के प्रेरणास्रोत बताया।

बाबूलाल मरांडी का संघर्षपूर्ण जीवन और राजनीतिक यात्रा

बाबूलाल मरांडी का जन्म 11 जनवरी 1958 को गिरिडीह जिले के कोदाईबांक गांव (तिसरी प्रखंड) में संथाल आदिवासी परिवार में हुआ था। साधारण परिस्थितियों में पले-बढ़े मरांडी ने शुरुआत में ग्रामीण स्तर पर आदिवासी हितों के लिए काम किया।वे झारखंड राज्य आंदोलन के प्रमुख योद्धाओं में से एक रहे। राज्य गठन के बाद 15 नवंबर 2000 को झारखंड अलग राज्य बना, तो बाबूलाल मरांडी इसके प्रथम मुख्यमंत्री बने और मार्च 2003 तक इस पद पर रहे। उन्होंने राज्य की नींव रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

बाद में उन्होंने झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) की स्थापना की, लेकिन बाद में इसे भाजपा में विलय कर दिया। वे कई बार लोकसभा सांसद (12वीं से 15वीं लोकसभा) और केंद्रीय पर्यावरण एवं वन राज्य मंत्री भी रहे।

वर्तमान में:

  • झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष
  • धनवार से विधायक
  • भाजपा झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष (जुलाई 2023 से)

वे आदिवासी, दलित, गरीब और वंचित वर्गों के अधिकारों के मजबूत आवाज बने हुए हैं।

 

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