BNP की भारी जीत: तारिक रहमान की अगुवाई में 3 हिंदू उम्मीदवारों के साथ 212 सीटें, जमात-ए-इस्लामी मुख्य विपक्ष बनी

ढाका, 14 फरवरी 2026

 

बांग्लादेश के 13वें जातीय संसद (Jatiya Sangsad) चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने इतिहास रच दिया है। चुनाव आयोग के आधिकारिक और अनौपचारिक नतीजों के अनुसार, BNP और उसके सहयोगियों ने 299 में से 212 सीटें जीतकर स्पष्ट दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया है। यह 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के बाद पहला चुनाव था, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग को प्रतिबंधित कर दिया गया था।

‘द डेली स्टार’ की रिपोर्ट के मुताबिक, BNP अकेले 209 सीटें जीतने में सफल रही, जबकि उसके सहयोगी 3 अतिरिक्त सीटों पर जीते। पार्टी अध्यक्ष तारिक रहमान, जो 17 साल के निर्वासन के बाद दिसंबर 2025 में देश लौटे थे, ने ढाका-17 और बोगुरा-6 दोनों सीटों पर भारी अंतर से जीत दर्ज की। तारिक रहमान अब प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के लिए तैयार हैं, और सत्ता हस्तांतरण 17 या 18 फरवरी तक होने की उम्मीद है।

BNP के तीन हिंदू उम्मीदवारों की धमाकेदार जीत, जमात के एकमात्र हिंदू प्रत्याशी हारे
तारिक रहमान की अगुवाई वाली BNP की भारी जीत के बीच, अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधित्व ने भी चुनाव को खास बनाया। चुनाव आयोग और विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, BNP के तीन हिंदू उम्मीदवारों ने मजबूत प्रदर्शन किया, जबकि जमात-ए-इस्लामी के एकमात्र हिंदू उम्मीदवार को हार मिली।

  1. गयेश्वर चंद्र रॉय (Gayeshwar Chandra Roy):
    ढाका-3 सीट से BNP के वरिष्ठ नेता गयेश्वर चंद्र रॉय ने शानदार जीत हासिल की। उन्होंने जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार शाहीनूर इस्लाम को 15,000 से अधिक वोटों के अंतर से हराया। रॉय को लगभग 99,163 वोट मिले, जो उनकी लोकप्रियता और अल्पसंख्यक समुदाय में मजबूत आधार को दर्शाता है। वे BNP में हिंदू समुदाय के प्रमुख चेहरों में से एक हैं।
  2. नितई रॉय चौधरी (Nitai Roy Chowdhury):
    मगुरा-2 सीट से BNP के उपाध्यक्ष नितई रॉय चौधरी ने आरामदायक जीत दर्ज की। उन्हें 1,47,896 वोट मिले, जबकि जमात के उम्मीदवार मुस्तर्शिद बिल्लाह को 1,17,018 वोट मिले। चौधरी को BNP के भीतर अल्पसंख्यकों का सबसे बड़ा और प्रभावशाली चेहरा माना जाता है।
  3. एडवोकेट दीपेन देवान (Advocate Dipen Dewan):
    रांगामाटी संसदीय सीट से एडवोकेट दीपेन देवान ने भारी अंतर से जीत हासिल की। उन्हें लगभग 2,01,544 वोट मिले, जबकि निकटतम स्वतंत्र उम्मीदवार पोहेल चाकमा को सिर्फ 31,222 वोट मिले। यह जीत चटगांव हिल ट्रैक्ट्स में BNP की मजबूत पकड़ को दिखाती है।

इसके अलावा, अल्पसंख्यक (चाकमा) समुदाय के सचिंग प्रू (Saching Prue) ने बंदरबान निर्वाचन क्षेत्र से BNP के टिकट पर बड़ी जीत दर्ज की। उन्हें 1,41,455 वोट मिले, जबकि निकटतम प्रतिद्वंद्वी को महज 26,162 वोट मिले।दूसरी ओर, जमात-ए-इस्लामी के एकमात्र हिंदू उम्मीदवार कृष्णा नंदी (Krishna Nandi) को खुलना-1 सीट से हार का सामना करना पड़ा। वे 70,346 वोट ही हासिल कर सके, जबकि BNP के उम्मीदवार अमीर एजाज खान ने 1,21,352 वोट लेकर जीत दर्ज की।

दूसरी ओर, लंबे समय से राजनीतिक हाशिए पर रहीं जमात-ए-इस्लामी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है। पार्टी और उसके 11-सदस्यीय गठबंधन ने 77 सीटें जीतीं, जिसमें जमात अकेले 68 सीटों पर विजयी रही। यह जमात के लिए अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन है, जो 2013 के प्रतिबंध हटने के बाद पहली बार चुनाव में उतरी थी। जमात अब मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी है, हालांकि पार्टी ने मतगणना में अनियमितताओं का आरोप लगाया है।

चुनाव में कुल मतदान प्रतिशत लगभग 59-60% रहा, और यह प्रक्रिया शांतिपूर्ण बताई गई है। साथ ही हुए रेफरेंडम में अंतरिम सरकार के सुधार पैकेज को 68% से अधिक समर्थन मिला।

यह नतीजा दक्षिण एशिया की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई क्षेत्रीय नेताओं ने तारिक रहमान को बधाई दी है। BNP ने लोकतंत्र की बहाली, कानून का शासन मजबूत करने और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का वादा किया है।

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