बैंकॉक, 7 अप्रैल 2026
ओडिशा की 18 वर्षीय पायल नाग ने विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज 2026 (बैंकॉक) में कमाल का प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। वे दुनिया की पहली Quadruple Amputee (चारों अंगों से दिव्यांग) अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज हैं, जिन्होंने अपने पहले सीनियर अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में ही विश्व नंबर-1 और विश्व चैंपियन शीतल देवी को कंपाउंड महिला फाइनल में 139-136 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
पायल ने न केवल व्यक्तिगत स्वर्ण जीता, बल्कि डबल्स इवेंट में भी स्वर्ण पदक हासिल कर भारत की झोली में और पदक डाले। इस टूर्नामेंट में भारत ने कुल 16 पदक (7 स्वर्ण, 5 रजत और 4 कांस्य) जीते, जिसमें पायल की जीत सबसे चर्चित रही।

गरीबी और त्रासदी से विश्व मंच तक की अनोखी यात्रापायल नाग ओडिशा के बालंगीर जिले की रहने वाली हैं। उनके पिता बिजय नाग एक दिहाड़ी राजमिस्त्री (दैनिक मजदूर) हैं और परिवार बेहद गरीब है। लगभग 5-8 वर्ष की उम्र में रायपुर (छत्तीसगढ़) में एक निर्माण स्थल पर खेलते समय बिजली के लाइव तार से करंट लगने से उनके दोनों हाथ और दोनों पैर काटने पड़े।
इस हादसे के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए पायल को बालंगीर के पार्वतीगिरि बाल निकेतन अनाथालय में रख दिया गया। वहां उन्होंने मुंह से पेंटिंग करना सीखा। उनकी इन पेंटिंग्स को देखकर कोच कुलदीप वेदवान (जिन्होंने शीतल देवी को भी तैयार किया) ने उन्हें तीरंदाजी के लिए चुना।
2023 में तीरंदाजी शुरू करने वाली पायल पैर से धनुष को सहारा देकर और मुंह से तीर छोड़कर निशाना साधती हैं। महज तीन साल में वे राष्ट्रीय स्तर पर चैंपियन बनीं और अब विश्व स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर सबको चौंका दिया।
पायल की प्रेरणा भी शीतल देवी ही रही हैं। उन्होंने बताया कि वे शीतल दीदी के वीडियो देखकर तीरंदाजी शुरू की थीं। फाइनल में अपनी आदर्श को हराने के बाद पायल ने भावुक होते हुए कहा, “अनाथालय से निकलकर मैं शीतल दीदी को हरा सकती हूं, तो पैरालंपिक गोल्ड भी जीत सकती हूं।”
भावुक पल: शीतल देवी ने पायल की व्हीलचेयर धकेली
फाइनल के बाद जब भारतीय राष्ट्रगान बज रहा था, तो विश्व चैंपियन शीतल देवी ने खुद पायल की व्हीलचेयर को पोडियम पर धकेला। यह खेल भावना और सहयोग की बेहतरीन मिसाल बनी। कोच कुलदीप वेदवान ने पायल की तारीफ करते हुए कहा, “पायल दुनिया की इकलौती क्वाड्रुपल अम्प्यूटी तीरंदाज हैं। उनकी जीत मेहनत, समर्पण और दृढ़ इच्छाशक्ति की मिसाल है।”
पायल का सपना: पैरालंपिक में स्वर्ण
पायल अब एशियन पैरा गेम्स और आगामी पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतने का लक्ष्य रखती हैं। उनकी यह उपलब्धि साबित करती है कि कोई भी शारीरिक अड़चन इंसान के हौसले के आगे छोटी पड़ जाती है। पायल नाग की कहानी गरीबी, विकलांगता और सामाजिक चुनौतियों से लड़कर आगे बढ़ने वाली हर लड़की-लड़के के लिए प्रेरणा है। ओडिशा और पूरे भारत को इस अनोखी उपलब्धि पर गर्व है।
