रांची/दुबई, 2 फरवरी 2026
झारखंड के प्रवासी मजदूरों की मुसीबतें एक बार फिर सुर्खियों में हैं। गिरिडीह, हजारीबाग और बोकारो जिलों के कुल 14 मजदूर दुबई में गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। अक्टूबर 2025 में ईएमसी कंपनी (या संबंधित ठेकेदार के माध्यम से) में ट्रांसमिशन लाइन बिछाने के काम पर गए ये मजदूर पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं पा रहे हैं। कंपनी द्वारा समय पर मजदूरी न देने और ओवरटाइम काम कराने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है। कई मजदूर दो दिनों से भूखे हैं, खाने-पीने और रहने की मूलभूत सुविधाएं भी प्रभावित हैं।
मजदूरों ने अपनी पीड़ा एक वीडियो के जरिए साझा की है, जिसमें वे केंद्र और झारखंड सरकार से तत्काल मदद और सुरक्षित वतन वापसी की अपील कर रहे हैं। यह वीडियो प्रवासी मजदूरों के हित में कार्यरत सामाजिक कार्यकर्ता सिकन्दर अली को भेजा गया था, जिन्होंने इसे मीडिया के साथ साझा किया। सिकन्दर अली ने कहा कि यह कोई पहला मामला नहीं है। मजदूर अक्सर ज्यादा कमाई की लालच में विदेश जाते हैं, लेकिन ठेकेदारों और कंपनियों की लापरवाही से फंस जाते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार और झारखंड सरकार से कूटनीतिक स्तर पर त्वरित हस्तक्षेप की मांग की है।
फंसे मजदूरों के नाम और जिले
ये मजदूर मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों से हैं:
- गिरिडीह जिला (सरिया, बगोदर, डुमरी थाना क्षेत्र): रोशन कुमार, अजय कुमार, राजेश महतो, अजय कुमार (मंडरो/डुमरडेली)।
- बोकारो जिला (पेंक नारायणपुर थाना क्षेत्र): डालेश्वर महतो (कंजकीरो)।
- हजारीबाग जिला (बिष्णुगढ़, सिरैय, पारजोरिया, चकचुको बसरिया, गोरहर थाना क्षेत्र): जागेश्वर महतो, फालेन्द्र महतो, बैजनाथ महतो, दिलीप महतो, गंगाधर महतो, त्रिलोकी महतो, दीपक कुमार, रोहित महतो, सेवा महतो।
ये सभी मजदूर अक्टूबर 2025 में दुबई पहुंचे थे, लेकिन कंपनी द्वारा वेतन रोकने के बाद वे मोहताज हो गए हैं।
संबंधित अन्य घटनाएं और चिंता
सिकन्दर अली ने एक और दर्दनाक घटना की ओर इशारा किया। गिरिडीह जिले के डुमरी थाना क्षेत्र के मधगोपाली पंचायत (दूधपनिया गांव) निवासी विजय कुमार महतो की 23 अक्टूबर 2025 को सऊदी अरब में मौत हो गई थी, लेकिन तीन महीने बाद भी उनका शव परिवार को नहीं सौंपा गया और न ही मुआवजा मिला है।
यह मामला झारखंड के प्रवासी मजदूरों की बार-बार होने वाली समस्याओं को उजागर करता है। पिछले साल जून 2025 में भी दुबई (या अबू धाबी) में 15 झारखंडी मजदूर मसाई कॉन्ट्रैक्टिंग कंपनी में फंसे थे, जहां वेतन न मिलने से वे भूखे-प्यासे थे। झारखंड सरकार के हस्तक्षेप से उनकी वापसी हुई थी। इसी तरह, 2025 में ही ट्यूनीशिया में 48 मजदूर फंसे थे, जिनकी वापसी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर हुई।
सरकार से अपील
सामाजिक कार्यकर्ताओं और मजदूरों की मांग है कि:
- भारतीय दूतावास (UAE) और झारखंड सरकार के प्रवासी श्रमिक सेल के माध्यम से कंपनी पर दबाव बनाया जाए।
- मजदूरों के बकाया वेतन का भुगतान कराया जाए।
- तत्काल टिकट और सुरक्षित वापसी की व्यवस्था की जाए।
झारखंड सरकार के प्रवासी श्रमिक कंट्रोल सेल और मुख्यमंत्री कार्यालय से इस मामले में जल्द कार्रवाई की उम्मीद है।
