राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अंबाला एयरफोर्स स्टेशन से राफेल फाइटर जेट में भरी ऐतिहासिक उड़ान

नई दिल्ली/अंबाला, 29 अक्टूबर 2025

 

भारत की प्रथम नागरिक और सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज हरियाणा के अंबाला एयरफोर्स स्टेशन से फ्रांस निर्मित अत्याधुनिक राफेल लड़ाकू विमान में उड़ान भरी। यह उड़ान भारतीय वायुसेना की क्षमताओं का जीवंत प्रदर्शन बन गई, जो न केवल देश की रक्षा ताकत को रेखांकित करती है, बल्कि महिला सशक्तिकरण का भी प्रतीक है। राष्ट्रपति मुर्मू राफेल जेट में उड़ान भरने वाली पहली आदिवासी महिला और स्वतंत्र भारत की दूसरी महिला राष्ट्रपति बनीं।

कार्यक्रम का विवरण

राष्ट्रपति मुर्मू सुबह दिल्ली से हवाई मार्ग द्वारा अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं, जहां भारतीय वायुसेना ने उन्हें पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया।

कार्यक्रम में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। राष्ट्रपति को राफेल विमान की तकनीकी विशेषताओं और उड़ान प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।उड़ान सुबह 11:00 से 11:30 बजे के बीच निर्धारित समय पर शुरू हुई, जो लगभग 30 मिनट की रही। इस दौरान राफेल ने अंबाला शहर के ऊपर प्रतीकात्मक चक्कर लगाया और बेसिक एयरोबेटिक मनोवर्स प्रदर्शित किए।

उतरने के बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने पायलट दल की सराहना की और कहा, “राफेल हमारी वायुसेना की क्षमता को कई गुना बढ़ाने वाला है। देश के नागरिकों को इस पर गर्व होना चाहिए।” उन्होंने वायुसेना के अधिकारियों और जवानों को संबोधित करते हुए भारतीय वायुसेना की आधुनिकता, आत्मनिर्भरता और शौर्य की प्रशंसा की।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने वायुसेना की ड्रेस पहन रखी थी, जो उनके सैन्य उत्साह को दर्शाती थी। उड़ान से पहले उन्होंने हाथ हिलाकर उपस्थित सैनिकों और अधिकारियों का अभिवादन किया, जिससे माहौल में जोश भर गया।

ऐतिहासिक महत्व

राफेल विमान को सितंबर 2020 में अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था। यह 17 स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज’ का हिस्सा है, जो भारत की हवाई सीमा की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
राष्ट्रपति मुर्मू की यह उड़ान सुखोई-30 एमकेआई के बाद उनका दूसरा ऐसा अनुभव है। अप्रैल 2023 में उन्होंने असम के तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन से सुखोई-30 एमकेआई में उड़ान भरी थी।
इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (2006) और प्रतिभा पाटिल (2009) ने सुखोई-30 एमकेआई में उड़ान भरी थी। राष्ट्रपति मुर्मू का यह कदम न केवल वायुसेना का मनोबल बढ़ाएगा, बल्कि आदिवासी समुदाय और महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा।

नारी शक्ति और रक्षा आधुनिकीकरण का प्रतीकराष्ट्रपति मुर्मू की उड़ान को भारत की बढ़ती नारी शक्ति और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के प्रयासों का प्रतीक माना जा रहा है। यह घटना हिंद महासागर से हिमालय तक भारत की निर्णायक रक्षा क्षमता का संदेश देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि राफेल जैसे विमान वायुसेना को क्षेत्रीय चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाते हैं।

राष्ट्रपति सचिवालय ने एक बयान में कहा कि यह उड़ान भारतीय वायुसेना की आधुनिक क्षमताओं और राष्ट्रपति की सशस्त्र बलों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

 

 

 

 

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