FY26 में 7.4% जीडीपी वृद्धि का अनुमान, FY27 के लिए 6.8-7.2% – भारत चौथे साल सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था

दिल्ली, 29 जनवरी 2026

 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार (29 जनवरी 2026) को लोकसभा में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश किया। यह सर्वेक्षण भारत की अर्थव्यवस्था की स्थिति का आधिकारिक मूल्यांकन है और आगामी यूनियन बजट 2026-27 के लिए आधार तैयार करता है।

प्रमुख हाइलाइट्स:

संभावित विकास दर में उछालआर्थिक सर्वेक्षण में भारत की मध्यम अवधि की संभावित विकास दर (Potential Growth Rate) को महत्वपूर्ण रूप से संशोधित किया गया है। पहले आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 में यह 6.5% आंकी गई थी। अब, पिछले कुछ वर्षों में लागू सुधारों, मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता, सार्वजनिक निवेश और बुनियादी ढांचे के विस्तार के प्रभाव से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत की उत्पादन क्षमता काफी मजबूत हुई है।

7% अब भारत की नई सामान्य विकास दर – आर्थिक सर्वेक्षण 

भारत की संभावित विकास दर अब लगभग 7% के स्तर पर पहुंच गई है। यानी 7% की विकास दर अब नया सामान्य (New Normal) बन रही है।

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन की प्रस्तावना में इस उन्नयन का जिक्र करते हुए कहा गया है कि नीतिगत सुधारों और निवेश के संचयी प्रभाव से अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित वृद्धि क्षमता बढ़ी है, भले ही वैश्विक चुनौतियां बनी हुई हों।

यह बदलाव भारत की आर्थिक मजबूती को दर्शाता है, जहां घरेलू मांग, निवेश और आपूर्ति पक्ष की ताकत वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विकास को सहारा दे रही है।

विकास के अन्य अनुमान

वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए पहली अग्रिम अनुमानों (First Advance Estimates) के अनुसार वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.4% रहने का अनुमान है, जबकि सकल मूल्य वर्धन (GVA) में 7.3% की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे भारत चौथे लगातार वर्ष दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।

वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए जीडीपी वृद्धि 6.8% से 7.2% के दायरे में रहने का अनुमान है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि घरेलू चालक मजबूत हैं और मैक्रो स्थिरता बनी हुई है, इसलिए विकास का जोखिम संतुलित है – सतर्कता जरूरी है, लेकिन निराशावाद की कोई जगह नहीं।

अन्य महत्वपूर्ण बिंदु

सर्वेक्षण में सुधारों के प्रभाव पर जोर दिया गया है, जैसे:बुनियादी ढांचे का विस्तार (एयरपोर्ट नेटवर्क में दोगुना होना, अंतर्देशीय जलमार्गों का विकास)।

राज्य स्तर पर विनियमन में ढील से छोटे-मध्यम उद्यमों की क्षमता बढ़ना।

मजबूत घरेलू मांग और निवेश से अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं (जैसे व्यापार युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव) के बावजूद स्थिर बनी हुई है।

यह सर्वेक्षण भारत की आर्थिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो दर्शाता है कि सुधारों से संभावित विकास दर में स्थायी सुधार आया है। आगामी बजट में इन निष्कर्षों पर आधारित नीतियां अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाने में मदद करेंगी।

 

 

 

 

 

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