नई दिल्ली/कोहिमा, 22 फरवरी 2026
केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) द्वारा जारी हालिया निर्देशों के अनुसार आधिकारिक कार्यक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से पहले राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को गाया या बजाया जाना अनिवार्य है। इस निर्देश का पूर्वोत्तर भारत के प्रभावशाली छात्र संगठन नगा स्टूडेंट्स फेडरेशन (एनएसएफ) ने जोरदार विरोध किया है।
एनएसएफ ने 20 फरवरी को जारी अपने बयान में कहा कि यह निर्देश एक सख्त प्राथमिकता क्रम थोपता है, खासकर स्कूलों पर लागू होने के कारण। संगठन का कहना है कि यह नगा समाज की ऐतिहासिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक वास्तविकताओं की अनदेखी करता है। एनएसएफ ने स्पष्ट किया कि वे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51A(क) से अवगत हैं, लेकिन कोई भी प्राधिकरण नगा मातृभूमि पर ऐसी सांस्कृतिक या विचारधारात्मक अनुपालन के लिए मजबूर नहीं कर सकता जो उनकी विशेष पहचान और इतिहास को नजरअंदाज करे।
गृह मंत्रालय के 10 पृष्ठों के आदेश (जनवरी 2026 में जारी) में कहा गया है कि जब राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ एक साथ प्रस्तुत किए जाते हैं, तो पहले ‘वंदे मातरम’ गाया या बजाया जाएगा। इस दौरान श्रोताओं को सावधान मुद्रा में खड़ा रहना होगा। आदेश में स्कूलों में दिन की शुरुआत सामूहिक ‘वंदे मातरम’ गायन से करने और दोनों राष्ट्रीय गीतों को लोकप्रिय बनाने की सिफारिश भी की गई है।
एनएसएफ ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि स्कूलों में ‘वंदे मातरम’ को अनिवार्य रूप से राष्ट्रगान से पहले गाने या बजाने की कोई गतिविधि नगा क्षेत्र में नहीं होने दी जाएगी। संगठन ने नगालैंड बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन (एनबीएसई) से अपील की है कि वह इस प्रोटोकॉल को लागू करने के लिए कोई परिपत्र या अधिसूचना जारी न करे। साथ ही स्कूल प्रबंधन और प्रशासकों को चेतावनी दी है कि बिना स्थानीय परिस्थितियों की समझ और संबंधित पक्षों से परामर्श के ऐसे दिशानिर्देश लागू न करें।
एनएसएफ ने ‘नगा होमलैंड’ में इस तरह के अनिवार्य गायन या वादन के खिलाफ सख्त चेतावनी जारी की है, जिससे नगा छात्रों और समाज में असंतोष बढ़ सकता है। यह विरोध नगा पहचान और सांस्कृतिक स्वायत्तता के मुद्दे को फिर से उजागर करता है।
