रांची, 16 जनवरी 2026
पेयजल विभाग में कथित 22-23 करोड़ रुपये के घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोपी अनुबंध कर्मचारी संतोष कुमार ने ईडी अधिकारियों पर मारपीट का गंभीर आरोप लगाया है। इस विवाद ने केंद्रीय जांच एजेंसी और राज्य पुलिस को आमने-सामने ला दिया है। न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने रांची पुलिस की जांच पर अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही निर्देश दिया कि ईडी कार्यालय की सुरक्षा अब CISF या BSF द्वारा की जाएगी।
ईडी ने झारखंड हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका दाखिल की, जिसमें रांची पुलिस द्वारा दर्ज FIR और जांच को चुनौती दी गई है।यह मामला पेयजल विभाग में कथित 22-23 करोड़ रुपये के घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, जिसमें संतोष कुमार आरोपी हैं। ईडी ने उन्हें पूछताछ के लिए 12 जनवरी 2026 को बुलाया था। संतोष कुमार ने आरोप लगाया कि ईडी अधिकारियों (सहायक निदेशक प्रतीक और सहायक शुभम) ने उनसे जबरन बयान लेने के लिए मारपीट की, सिर फोड़ा और धमकाया, जिसके बाद उन्हें सदर अस्पताल में 6 टांके लगे।
इसके आधार पर संतोष ने रांची के एयरपोर्ट थाने में FIR दर्ज कराई (कांड संख्या 05/2026), जिसके बाद रांची पुलिस की टीम 15 जनवरी 2026 को ईडी कार्यालय (एयरपोर्ट रोड, हिनू) पहुंची और जांच की। ईडी ने इसे अपनी जांच में हस्तक्षेप और सबूतों से छेड़छाड़ का प्रयास बताते हुए हाईकोर्ट का रुख किया।
झारखंड हाईकोर्ट का फैसला
न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने रांची पुलिस की जांच पर रोक लगा दी है। साथ ही निर्देश दिया कि ईडी कार्यालय की सुरक्षा अब CISF या BSF द्वारा की जाएगी। कोर्ट ने राज्य सरकार को 7 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने और निजी रेस्पॉन्डेंट संतोष कुमार को 10 दिनों के अंदर अपना जवाब पेश करने का आदेश दिया है। ईडी ने FIR निरस्त करने, CBI जांच कराने और पुलिस कार्रवाई पर रोक की मांग की थी।यह घटनाक्रम केंद्रीय जांच एजेंसी और राज्य पुलिस के बीच अधिकार क्षेत्र के टकराव को उजागर करता है, जिस पर राजनीतिक दलों ने भी तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं। आगे की सुनवाई में दोनों पक्षों के जवाबों के आधार पर फैसला होगा।
