चास (बोकारो), 23 फरवरी 2026
झारखंड के बोकारो जिले के चास प्रखंड अंतर्गत कनारी पंचायत के बरुआटांड़ गांव में 22 फरवरी 2026 को मराड.बुरु बाहा बोंगा समिति की ओर से फाल्गुन मूलूक् मोड़ें माहा में बाहा पोरोब (सरहूल पूजा) बड़े ही हर्षोल्लास और पारंपरिक तरीके से संपन्न हुआ। यह त्योहार संथाल आदिवासी समुदाय के लिए फूलों का महापर्व है, जो प्रकृति पूजा, नई फसल और सरना धर्म की रक्षा का प्रतीक माना जाता है।
समिति के अध्यक्ष सह बरुआटांड़ ग्राम प्रधान उपेंद्र हेम्बरम और नायके (पूजारी) कालीचरण किस्कू ने जाहेरथान में जाहेर आयो, मराड.बुरु, परगना बाबा, लुगूबुरू बाबा, लुगूआयो आदि ईष्ट देवी-देवताओं को सखुआ और महुआ फूल अर्पित किए। सखुआ वृक्ष पर जलाभिषेक कर प्रकृति, पर्यावरण और सरना धर्म की रक्षा का संकल्प लिया गया।मौके पर संबोधित करते हुए बरुआटांड़ के प्राणिक सह सेंगेल जिला अध्यक्ष और बोकारो जोनल हेड सुखदेव मुर्मू ने कहा कि आदिवासियों का सरना धर्म प्रकृति पूजक बाहा बोंगा (सरहूल पूजा) समाज में एकता, विजय और हक-अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने भूमि (हासा), भाषा, जाति, धर्म (मराड.बुरु, लुगूबुरु), इज्जत, रोजगार और चास-वास की सुरक्षा के साथ बृहद सामाजिक एकता, राजनीतिक-धार्मिक-सांस्कृतिक एकजुटता का आह्वान किया।

मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों के उद्गगार
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि कनारी पश्चिम पंचायत की मुखिया रजनी देवी ने कहा कि बाहा पोरोब आदिवासी समुदाय का सबसे पवित्र त्योहार है। जब तक नायके द्वारा जाहेरथान में सखुआ-महुआ फूलों की पूजा नहीं हो जाती, तब तक इन फूलों का उपयोग वर्जित रहता है। यह परंपरा हमें सिखाती है कि प्रकृति से पहले उसका आभार प्रकट करना चाहिए। मुखिया रजनी देवी ने जल्द ही जाहेरथान की चारदीवारी और जल व्यवस्था के लिए डीप बोरिंग या चापाकल की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया।विशिष्ट अतिथि आदिवासी सेंगेल अभियान के प्रदेश संयोजक सह बोकारो जोनल परगना करमचंद हांसदा ने जोर दिया कि आदिवासियों की प्रकृति पूजक भाषा-संस्कृति को बचाने के लिए सरना धर्म कोड लागू करना अनिवार्य है। साथ ही, संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त संताली भाषा को झारखंड में प्रथम राजभाषा बनाने की मांग की।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और उपस्थिति
पूजा के बाद सभी श्रद्धालु जाहेर आयो और मराड.बुरु के चरणों में नतमस्तक हुए। सरना धर्म एकता की प्रार्थना की गई। मांदर और नगाड़े की थाप पर पारंपरिक परिधानों में जाहेर नृत्य हुआ।
कार्यक्रम में पूर्व माझी हाड़म गुहीराम हेम्बरम, भीम मुर्मू, पूर्व जिला परिषद सदस्य गुलाबी देवी, सेंगेल झारखंड प्रदेश संयोजक जयराम सोरेन, चंदनकियारी प्रखंड सेंगेल अध्यक्ष राजेश मुर्मू, बोकारो जिला सेंगेल संयोजक गोपीनाथ मुर्मू, पेटरवार प्रखंड सेंगेल बी.डी.ओ. विजय मरांडी, राखो किस्कू, बिरेंद्र सोरेन, बिन्तोष टुडू, बुटन बेसरा, मनोज किस्कू, चेतलाल किस्कू, संजूल मुर्मू, छोटेलाल हेम्बरम, बिनोद हेम्बरम, दशरथ सोरेन, जीतराम बेसरा, रामचंद्र बेसरा, नागेश्वर मुर्मू, मुकेश किस्कू, मुंगेश्वर सोरेन, बिरेंद्र नाथ सोरेन, शिवराम किस्कू, सावित्री मुर्मू, काजल हेम्बरम, सोनिया किस्कू सहित सैकड़ों महिलाएं-पुरुष शामिल हुए।
