महासभा ने झारखंड के वित्त मंत्री से किया राज्य के आगामी बजट में महत्वपूर्ण बिंदुओं पर निर्णय लेने की मांग।

 

रांची,

झारखंड जनाधिकार महासभा के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज वित्त मंत्री, राधाकृष्ण किशोर से मुलाकात कर आगामी बजट सत्र से पहले राज्य के गरीब और हाशिए पर मौजूद समुदायों से जुड़े अहम मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया एवं उनको आगामी बजट (2025-26) में आवश्यक प्रावधान करने का सुझाव दिया| महासभा ने बहुत समय से विलम्बित सामाजिक सुरक्षा पेंशन, मध्याह्न भोजन रसोइयों के वेतन में सुधार, मातृत्व लाभ योजना के विस्तार, राज्य की न्यूनतम मजदूरी दर में वृद्धि और शिक्षकों की नियुक्ति जैसे अहम मुद्दों को उठाया।

महासभा ने पिछले पांच महीनों से लंबित सामाजिक सुरक्षा पेंशन के तत्काल भुगतान की मांग की और इसे ₹1000 से बढ़ाकर मईया सम्मान योजना के बराबर ₹2500 करने का सुझाव दिया। मध्याह्न भोजन बनाने वाली रसोइयों के वेतन में वृद्धि, उन्हें मईया सम्मान योजना में शामिल करने, और राज्य की न्यूनतम मजदूरी दर में वृद्धि का भी अनुरोध किया गया। झारखंड में गंभीर शिक्षक कमी की ओर ध्यान आकर्षित किया, जहां एक तिहाई प्राथमिक स्कूल सिर्फ एक शिक्षक पर निर्भर हैं, और मांग की कि आरटीई कानून के तहत शिक्षकों की तत्काल भर्ती हो। साथ ही, मातृत्व लाभ को ₹6000 से बढ़ाकर ₹12,000 करने और ओडिशा की ममता योजना की तर्ज पर राज्य सरकार की अपनी मातृत्व योजना शुरू करने का सुझाव दिया गया। साथ ही, महासभा ने मंत्री को गठबंधन दलों द्वारा किए गए चुनावी वादों को भी याद दिलाया जैसे की लैंड बैंक व भूमि अधिग्रहण कानून संशोधन 2017 को तुरंत रद्द करने और गैर-ज़िम्मेदार व अनियंत्रित माइनिंग से बचाव| यह भी मांग किया कि सरकार तुरंत उन वादों को पूरा करने की दिशा में कार्यवाई करे।

बैठक में वित्त मंत्री ने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए आश्वासन दिया कि सरकार, सामाजिक सुरक्षा पेंशन व मध्याह्न भोजन रसोइयों के मानदेय में वृद्धि के लिए विचार करेगी। उन्होंने झारखंड में मातृत्व लाभ योजना के विस्तार के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करने का भी वादा किया।उन्होंने ई-केवाईसी से जुड़ी समस्याओं को लेकर आगामी एसएलडीसी बैठक में चर्चा करने और झारखंड जनाधिकार महासभा के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित करने की बात कही।मंत्री ने यह भी बताया कि झारखंड सरकार विस्थापन आयोग की स्थापना की दिशा में लगातार काम कर रही है।अंत में, महासभा द्वारा उठाए गए कोडरमा और गिरिडीह के ढिबरा मजदूरों, चांडिल और मालय डैम के विस्थापित परिवारों, और जाति प्रमाण पत्र जारी करने में आ रही समस्याओं के संबंध में मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार इन मुद्दों को गंभीरता से लेगी और जनता के सुझावों को प्राथमिकता दी जाएगी।

प्रतिनिधि मंडल में अम्बिका यादव, अपूर्वा, अशोक वर्मा, ज्यां द्रेज, मनोज भुईयां, प्रवीर पीटर, रिया तूलिका पिंगुआ एवं रोज़ ख़ाखा शामिल थे।

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