पड़हा राजा सोमा मुंडा हत्याकांड: मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर झारखंड बंद, लोहरदगा में निकला मशाल जुलूस, खूंटी-सरायकेला में जनजीवन ठप

रांची/खूंटी/लोहरदगा, 17 जनवरी 2026

 

झारखंड के खूंटी जिले में 7 जनवरी को आदिवासी पारंपरिक नेता एवं एदेल संगा पड़हा राजा सोमा मुंडा की गोली मारकर हत्या के विरोध में आज विभिन्न आदिवासी संगठनों द्वारा बुलाए गए झारखंड बंद का राज्य के कई हिस्सों में प्रभाव देखा जा रहा है। बंद का आह्वान मुख्य रूप से हत्याकांड के मुख्य साजिशकर्ताओं और फरार शूटर्स की तत्काल गिरफ्तारी, पीड़ित परिवार को मुआवजा व सुरक्षा, तथा आदिवासी पारंपरिक अधिकारों (जल, जंगल, जमीन) और ‘पड़हा’ व्यवस्था की रक्षा की मांग को लेकर किया गया है।

कल (16 जनवरी) शुक्रवार को लोहरदगा जिले में रूढ़िजन्य पारंपरिक आदिवासी समुदायों के संयुक्त तत्वावधान में एक बड़ा मशाल जुलूस निकाला गया। जुलूस में आदिवासी एकता मंच, आदिवासी समन्वय समिति, आदिवासी स्वशासन एकता मंच सहित कई संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रतिभागियों ने मशालें जलाकर और नारे लगाकर अपनी एकजुटता दिखाई। वक्ताओं ने कहा कि सोमा मुंडा की हत्या व्यक्तिगत नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, स्वशासन और भूमि अधिकारों पर सुनियोजित हमला है। उन्होंने पुलिस जांच पर असंतोष जताते हुए मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग दोहराई।

आज बंद का असर आदिवासी बहुल जिलों में व्यापक रहा। खूंटी (घटना स्थल) और सरायकेला-खरसावां में जनजीवन पूरी तरह ठप रहा—सड़क जाम, दुकानें बंद, यातायात प्रभावित, कई जगह टायर जलाकर विरोध प्रदर्शन। चाईबासा (पश्चिमी सिंहभूम) में भी सड़क जाम और बस सेवा ठप रही। रांची में मिला-जुला लेकिन प्रभावी असर देखा गया—दलादली चौक, पिठौरिया जैसे इलाकों में प्रदर्शन, कुछ स्कूलों में छुट्टी। अन्य जिलों जैसे लोहरदगा, गुमला में बंद का अच्छा असर रहा, लेकिन पूर्ण राज्यव्यापी बंद नहीं। आवश्यक सेवाएं (अस्पताल, एम्बुलेंस, दवा दुकानें, दूध आपूर्ति) मुक्त रखी गईं। पुलिस और प्रशासन अलर्ट पर हैं, अब तक कोई बड़ी अप्रिय घटना नहीं हुई।

हत्या का विवरण: सोमा मुंडा, अबुआ झारखंड पार्टी के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और 22-56 गांवों के पारंपरिक मुखिया ‘एदेल संगा पड़हा राजा’ थे। 7 जनवरी को खूंटी थाना क्षेत्र के जमुआदाग (या जियारप्पा गांव) के पास बाइक से पत्नी के साथ घर लौटते समय अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी। हत्या का कारण 3.16 एकड़ विवादित जमीन पर पारंपरिक ‘पढ़ा जात्रा मेला’ के आयोजन को रोकने और उसे बेचने की कोशिश से जुड़ा बताया जा रहा है। पुलिस ने अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन मुख्य साजिशकर्ता और शूटर फरार हैं। संगठन पुलिस पर लीपापोती का आरोप लगा रहे हैं और CBI जांच की मांग भी उठा रहे हैं।

बंद का समर्थन आदिवासी समन्वय समिति, आदिवासी एकता मंच, आदिवासी महासभा, केंद्रीय सरना समिति, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद, मानकी मुंडा संघ, झारखंड पार्टी सहित 20-30 से अधिक संगठनों ने किया है। आंदोलनकारी मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी तक संघर्ष जारी रखने की चेतावनी दे रहे हैं। यह घटना आदिवासी समाज में गहरा आक्रोश पैदा कर रही है, जो जल-जंगल-जमीन के अधिकारों और पारंपरिक प्रथाओं की रक्षा से जुड़ी है।

 

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